Sunday, April 18, 2010

डरता हूँ कि कभी ,

डरता हूँ कि कभी ,
न ऐसा दिन आ जाए ,
के खुद अपने आप ही 
से नफरत हो जाए |

डरता हूँ कि कभी ,
न ऐसा दिन आ जाए ,
के खुद अपने सामने ही
अपना जनाज़ा उठ जाये   |

डरता हूँ कि कभी 
न ऐसा असमंजस आ जाए ,
के खुद अपने उसूल ही,
समझौते में रख जाए |

डरता हूँ कि कभी ,
न सामने वो पल आ जाए 
के खुद अपनी गिनती भी,
पूरी दुनिया संग हो जाए |
                  
                  - ताबिश 'शोहदा' जावेद 

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