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Wednesday, February 4, 2009

मेरा सवाल

मेरी इस बेमंजिल ज़िन्दगी में,
दर्द बेपनाह है|
संगदिल मेरा ये,
यादों का बयाँबा है|


मन जानता नहीं मेरा बेवफाई,
पर हर कदम पर तनहा है|
पूछता रहता है यही सवाल
वफ़ा का अब सिला कहाँ है?


नादान जानता नहीं की,
ज़माने का निजाम अब बदला है|
हर शख्स अब बेरूह है,
हर दिल में खला है|


गिला नहीं की मेरा गम बेपनाह है,
पर जाने कब से दिल में ये सवाल बसा है|
या खुदा दिल उसी का क्यूँ कमजोर बना है,
नसीब में जिसके दर्द बेपनाह है|

-ताबिश'शोहदा'जावेद

Wednesday, December 17, 2008

राहगीर

राहें तन्हा हैं सारी,
मुझे हमसफर नहीं मिलता।
दिल में कई राज़ हैं पोशीदाह,
मुझे हमराज़ नहीं मिलता।।

पीने को तो पी लूँ ,
पर साकी दिलदार नहीं मिलता।
मंजिल को पाने की ललक है,
पर रहबर वफादार नहीं मिलता॥

तड़पता बहुत है दिल मेरा,
मुझे हमदर्द नहीं मिलता।
आँखों में है आँसू लहू के ,
मुझे कोई गमगुसार नहीं मिलता॥

तूफान है मेरी तकदीर में,
मुझे साहिल नहीं मिल सकता।
हर मोड़ पर फरेब,
क्या मुझे एक कातिल नहीं मिल सकता ॥

- ताबिश 'शोहदा' जावेद