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Thursday, March 26, 2009

दोस्त?

कल तो जो हमारी दोस्ती को अपनी ताकात कहते थे ,
आज वो हमारी कमजोरी जानने का दम भरते है ।

Saturday, March 7, 2009

ख्वाब नीलाम

वो चश्मा लाकर करोगे क्या ?
जो खुली आँखों को करता है रोशन ,
बंद आँखों को तो वो खोल नही सकता ,
ऐसे चश्मे से तुम्हे दिखेगा क्या ?

जेबघड़ी तुम लाकर करोगे क्या ?
गांधीजी तो जेब में रखते थे ,
तुम्हारी जेब तो खाली ही नही,
बताओ तुम उसे रखोगे कहाँ ?

वो थाली तो तुम बिल्कुल न लाना ,
गाँधीजी तो उसमे भोजन करते थे ,
तुम आदत से मजबूर उसमे छेद कर दोगे ,
बताओ फिर मुहं दिखाओगे क्या ?

हो सके तो उनके ख्वाब
खरीद लाओ,
क्यूंकि ज़मीर तुम्हारा तुम्हे रोक नही सकता ,
इस समान का कया है ले भी आओगे ,
तो फिर सियासत ही करोगे और करोगे क्या ?

-ताबिश 'शोहदा' जावेद




Monday, February 9, 2009

तलाश

एक अदद दोस्त की तलाश है
वो जो आखों से पढ़े दिल की बात,
जो हो तैयार हर वक्त देने को साथ ,
ऐसे एक दोस्त की तलाश है।

एक अदद दोस्त की तलाश है
देख के मेरे आंसूं हो पलकें उसकी नम,
जो न बोले 'मैं' हमेशा कहे हम,
ऐसे अक दोस्त की तलाश है ।


एक अदद दोस्त की तलाश है,
हर सिम्द फैले अंधेरे के लिए हो अफताब,
जाने मुझे मानो में हूँ एक खुली किताब,
ऐसे अक दोस्त की तलाश है ।

एक अदद दोस्त की तलाश है ,
वो जो हो मेरा हमरूह ,जो पढ़ ले मेरा मन,
बेशक तुम हो यहीं कहीं ,पर कब उठेगे चिल्मन,
उस पर से जिस दोस्त की मुझे तलाश है ।


-ताबिश 'शोहदा' जावेद