Sunday, April 18, 2010

डरता हूँ कि कभी ,

डरता हूँ कि कभी ,
न ऐसा दिन आ जाए ,
के खुद अपने आप ही 
से नफरत हो जाए |

डरता हूँ कि कभी ,
न ऐसा दिन आ जाए ,
के खुद अपने सामने ही
अपना जनाज़ा उठ जाये   |

डरता हूँ कि कभी 
न ऐसा असमंजस आ जाए ,
के खुद अपने उसूल ही,
समझौते में रख जाए |

डरता हूँ कि कभी ,
न सामने वो पल आ जाए 
के खुद अपनी गिनती भी,
पूरी दुनिया संग हो जाए |
                  
                  - ताबिश 'शोहदा' जावेद 

Monday, April 12, 2010

अपनी कहानी

दास्ताने ज़िन्दगी के हम ऐसे किरदार हैं,
दूसरों ने किस्से जोड़े,कहानी हमारी लिख गयी .
                                  -ताबिश 'शोहदा' जावेद

Wednesday, March 24, 2010

अजीब ख्वाब

ज़िन्दगी कि दौड़ में,
पेशेवर आगे निकल गए,
हम तकदीर को रोते रहे ,
वो  तदबीर सहारे निकल गए

साथियों के जमावड़े में,
तन्हा ही रह गए, 
तरक्की पर खुश होते रहे ,
असल में ,सब आगे निकल गए. 

सपनो कि फेहरिस्त में ,
ऐसा ख्वाब बुन गए ,
बरसो से सोते रहे ,
आज एक ख्वाब सहारे उठ गए . 
                     - ताबिश 'शोहदा'  जावेद


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